हैशटैग# नॉट इन माय नेम
(#NotInMyName)
(#NotInMyName)
दोस्तो , मॉर्निंग की न्यूजपेपर और चाय सबको भाती है लेकिन कोई इरिटेटिंग हेडलाइन आपका मूड खराब कर देती है। आज यही हुआ, अंग्रेजी अखबार "The Hindu" के पन्ने पलट रहा था तो चौथे पृष्ट पे एक फोटो पे मेरी दृष्टि गई। काले बुर्के में कुछ मुश्लिम महिलाये मुँह ढके एक बैनर लिए खड़ी है। बैनर को ध्यान से देखा तो पता चला कि ये महिला GIO अर्थात Girls Islamic Organization संस्था के बैनर तले खड़ी होके "Not In My Name" स्लोगन द्वारा नागपुर में विधान सभा स्क्वायर पे प्रोटेस्ट कर रही है।
परिदृश्य
प्रोटेस्ट का तो यूँ है कि मुश्लिम महिलाओ ने "ट्रिपल तलाक" और "हलाला" पे तो जंग ही चला रखा है। क्या सरकार और क्या कोर्ट सब के झुक गए और कट्टरपंथी मौलवी भी बेबस खड़े है।
प्रोटेस्ट का तो यूँ है कि मुश्लिम महिलाओ ने "ट्रिपल तलाक" और "हलाला" पे तो जंग ही चला रखा है। क्या सरकार और क्या कोर्ट सब के झुक गए और कट्टरपंथी मौलवी भी बेबस खड़े है।
खैर, ये प्रोटेस्ट 28 जून से चलन में आया जब दिल्ली NCR के एक शहर बल्लबगढ़ में "मोब लीचिंग" का एक मामला प्रकाश में आया। मेट्रो की सीट को लेकर हुई झगड़े में एक मुसलमान लड़के "जुनैद" को भीड़ ने पीट-पीट के मार डाला। गौर करने वाली बात ये है कि इस हत्या के पिछे कोई गो-रक्षा दल या कोई कट्टर हिंदूवादी संस्था भी नही है। गौरतलब है कि 23 जून को ही श्रीनगर में भीड़ ने एक कश्मीरी पुलिस को पीट -पीट के मार डाला, पुलिसकर्मी अपनी ड्यूटी निभा रहे थे और कुछ फोटो ले रहे थे।मारे गए पुलिसकर्मी का नाम "अयूब पंडित" था।
सोसल हैशटेग
लोकतंत्र में सत्ता या फिर किसी तंत्र के खिलाफ विरोध दर्ज करना पूर्णतः न्यायिक है और भारत जैसे देश मे हमेशा से लोग ऐसा करते आये है... कभी कभी तो ये विरोध सड़क से लेके दफ्तर तक , सरकारी से लेके गैरसरकारी , प्रत्येक स्थानों पे हिंसा और लूटमार में परिवर्तित हो जाता है।
आधुनिक भारत मे स्थिति थोड़ी बदली सी है और लोग अपना विरोध सोसल मीडिया पे करने लगे है।आम यूजर से लेके बड़े-बड़े सेलेब्रिटीज सब के सब यही प्लेटफॉर्म पसंद कर रहे है। ये सेफ है और समाज पे बड़ा इम्पेक्ट करती है।अगर किसी सेलेब्रिटी ने कोई पोस्ट किया तो टीवी, रेडियो ,अखबार भी उस पोस्ट को सुर्खियों पे स्थान देता है। अंदाज इसी बात से आप लगा सकते है कि सोसल मीडिया किस प्रकार खबरों की दुनियाँ में डॉमिनेट कर रहा है!
#Not In My Name
ये हैशटेग पिछले कुछ दिनों में टॉप ट्रेंडिंग में रहा। कारण यही की भारत मे अल्पसंख्यक मारे जा रहे है। लेकिन इस बार गोरक्षको पे इल्जाम नही लगा तो आखिर किसपे ये तोहमत थोपा जाए??? "अवार्ड वापसी गैंग" फिर से शहिष्णुता का राग अलापने #Not In My Name हैशटैग का सगुफ़ा छोड़ा है।
लोकतंत्र में सत्ता या फिर किसी तंत्र के खिलाफ विरोध दर्ज करना पूर्णतः न्यायिक है और भारत जैसे देश मे हमेशा से लोग ऐसा करते आये है... कभी कभी तो ये विरोध सड़क से लेके दफ्तर तक , सरकारी से लेके गैरसरकारी , प्रत्येक स्थानों पे हिंसा और लूटमार में परिवर्तित हो जाता है।
आधुनिक भारत मे स्थिति थोड़ी बदली सी है और लोग अपना विरोध सोसल मीडिया पे करने लगे है।आम यूजर से लेके बड़े-बड़े सेलेब्रिटीज सब के सब यही प्लेटफॉर्म पसंद कर रहे है। ये सेफ है और समाज पे बड़ा इम्पेक्ट करती है।अगर किसी सेलेब्रिटी ने कोई पोस्ट किया तो टीवी, रेडियो ,अखबार भी उस पोस्ट को सुर्खियों पे स्थान देता है। अंदाज इसी बात से आप लगा सकते है कि सोसल मीडिया किस प्रकार खबरों की दुनियाँ में डॉमिनेट कर रहा है!
#Not In My Name
ये हैशटेग पिछले कुछ दिनों में टॉप ट्रेंडिंग में रहा। कारण यही की भारत मे अल्पसंख्यक मारे जा रहे है। लेकिन इस बार गोरक्षको पे इल्जाम नही लगा तो आखिर किसपे ये तोहमत थोपा जाए??? "अवार्ड वापसी गैंग" फिर से शहिष्णुता का राग अलापने #Not In My Name हैशटैग का सगुफ़ा छोड़ा है।
आइये देखते है सोसल मीडिया के हैशटैग से भुतल पे कम्पैन चलनेवाले चेहरो पे- सबा दीवान-फिल्मकार, शबनम हाशमी-सामाजिक कार्यकर्ता, उमर खालिद- J N U का विवादित कॉम्युनिस्ट कश्मीरी मुस्लिम छात्र, A A P पार्टि के नेता,राजदीप सरदेसाई- सूदखोर पत्रकार, गिरीश कर्नाड- मुश्लिम कट्टरपंथी हितैषी फिल्मकार, तीष्ता शीतलवाड़- उगाही कार्यकर्ता, राणा अयूब- इस्लामिक कट्टरपंथी पोषक पत्रकार, नंदिता दास, शबाना आजमी, अग्निवेश, रामचंद्र गुहा, सेहला रशीद JNU कार्यकर्ता,गायक रब्बी शेरगिल, चिन्ना दुआ, अभिनेता माया राव, अभिनेत्री कल्कि कोएच्लिन, कोंकणा सेन, अपर्णा सेन, रेणुका सहाने, अभिनेता रजत कपूर, रणवीर श्रोय और फिल्मकार राकेश शर्मा शामिल थे। ये तमाम लोग अगल-अलग वैसे पेशेवर बुद्धिजीवी हैं जो मानते हैं कि अपने देश को बदनाम करने से ही इन्हें वैचारिक आजादी मिलेगी। इनके अलावा इस अभियान में बॉम्बे कैथोलिक सभा के पूर्व अध्यक्ष गॉर्डन डीसूजा, हिंदू की पूर्व संपादक मालिनी पार्थसारथी, एक्टिविस्ट अर्पिता चटर्जी के अलावा जेडीयू नेता के सी त्यागी वो चर्चित नाम हैं, जिन्होंने इस कैंपेन का हिस्सा बनकर ये साबित करने की कोशिश की, कि उनसे बड़ा मोदी विरोधी कोई नहीं हो सकता।
अब आप सोच रहे होंगे कि इसमे ऐसा क्या है जो इसकी चर्चा की जाये? हर दिन कुछ न कुछ तो सोसल मीडिया पे ट्रेंडिंग करता ही रहता है! तो मैं ये कहना चाहूँगा कि ये टैग प्रत्येक भारतीयों से संबंधित है और हम सभी भारतीयों पे ये टैग एक कालिख़ सी है जो हमारे देश के कुछ लोग पोत रहे है। इन्हें सीमा पे मर रहे जवानों की मौत से कोई सरोकार नही, कश्मीर में कोई पुलिस को पीट के मार दे तो इन्हें दर्द नही होता।
अभी हाल में ही पश्चिम बंगाल में मुसलमानों की भीड़ ने हिंसा का तांडव किया तो इसे ये जस्टिफाई करते है।
अभी हाल में ही पश्चिम बंगाल में मुसलमानों की भीड़ ने हिंसा का तांडव किया तो इसे ये जस्टिफाई करते है।
आज का प्रसंग
ये जो अंग्रेजी स्तंभ "द हिन्दू" ने छापा है "united against violence" सरासर मजाक है। ये कुछ लोग इस्लामिक बैनर तले वॉइलैंस के लिए खड़े है (united for violence) । मीडिया हाउस ऐसे खबरों को निरंतर तूल देते रहेंगे और अपना उल्लू सीधा करते रहेंगे। भारत पूरे एशिया महादेश में एक शान्तिपूर्ण राष्ट्र के रूप में उभरा है और हमे ऐसे फिजूल लोगो से सावधान रहने की आवश्यक्ता है।
जय हिंद!!!
ये जो अंग्रेजी स्तंभ "द हिन्दू" ने छापा है "united against violence" सरासर मजाक है। ये कुछ लोग इस्लामिक बैनर तले वॉइलैंस के लिए खड़े है (united for violence) । मीडिया हाउस ऐसे खबरों को निरंतर तूल देते रहेंगे और अपना उल्लू सीधा करते रहेंगे। भारत पूरे एशिया महादेश में एक शान्तिपूर्ण राष्ट्र के रूप में उभरा है और हमे ऐसे फिजूल लोगो से सावधान रहने की आवश्यक्ता है।
जय हिंद!!!

2 comments:
Very sensitive topic ....Tough to comment on it....but nice
आपके विचार 100% मेरे विचार से मेल खाता है। निरंतर लिखते रहिये।
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